Sunday, 22 November 2015

दिवाली की खुसी!

दीवाली आती है लोग खुशियाँ मनाते हैं ! 
घर को  सजा के दिया भी जलाते हैं  !!

आईं दीवाली सबकी काया सजती है !
आतिशबाजी और मिठाई भी बटती है !!
अपने घर रंग रोगन कराते हैं !
प्रदुषण पर्यावरण में फैलाते हैं !!
वर्ष-दर-वर्ष ये ही चक्र दोहराते हैं !
दीवाली के प्रयोजन सबको समझाते हैं !!

पर भूल गए दीवाली के असली अर्थ !
जीवन में करते हैं यदा कदा अनर्थ !!

दीया अपना आँगन में जलाते हैं !
दूसरे के घर के चिराग बुझाते हैं !!

लक्ष्मी कृपा पाने को पूजा करते हैं !
गृह लक्ष्मी को जला कर मारते हैं !!

कन्यां घर बुला भोजन कराते हैं !
कन्यां भ्रूण गर्भ में ही मार देते है !!

गंगा जल को अमृत बताते हैं !
अपशिष्ट सब उसी में बहाते हैं !!

गऊ माता चरण शीश झुकाते हैं !
बूढी हुईं कसाई को बेच आते हैं !!

माँ की ममता के गुण गाते है !
फिर बृद्ध आश्रम के राह दिखाते हैं !! 

दीवाली आती है लोग खुशियाँ मनाते हैं !
दीवाली की अशली अर्थ हम भूल जाते हैं !!



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