वर्ष-दर-वर्ष ये ही चक्र दोहराते हैं !
दीवाली के प्रयोजन सबको समझाते हैं !!
पर भूल गए दीवाली के असली अर्थ !
जीवन में करते हैं यदा कदा अनर्थ !!
दीया अपना आँगन में जलाते हैं !
दूसरे के घर के चिराग बुझाते हैं !!
लक्ष्मी कृपा पाने को पूजा करते हैं !
गृह लक्ष्मी को जला कर मारते हैं !!
कन्यां घर बुला भोजन कराते हैं !
कन्यां भ्रूण गर्भ में ही मार देते है !!
गंगा जल को अमृत बताते हैं !
अपशिष्ट सब उसी में बहाते हैं !!
गऊ माता चरण शीश झुकाते हैं !
बूढी हुईं कसाई को बेच आते हैं !!
माँ की ममता के गुण गाते है !
फिर बृद्ध आश्रम के राह दिखाते हैं !!
दीवाली आती है लोग खुशियाँ मनाते हैं !
दीवाली की अशली अर्थ हम भूल जाते हैं !!
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